राजेश कुमार जेके
ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा, छज्जला में विधि-विधान से किया गया गणेश प्रतिमा का विसर्जन
मेंढर, 26 सितंबर: मेंढर कस्बे में गणेश विसर्जन का पर्व शनिवार को धार्मिक श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूरे भक्ति भाव के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में सनातन श्रद्धालु, स्थानीय निवासी और गणमान्य लोग शामिल हुए।
गणेश विसर्जन के अवसर पर मेंढर के ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु भक्ति गीत और भजनों का गायन करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भगवान गणेश के जयकारे लगाए गए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि, भाईचारे और लोगों के कल्याण की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं में गणेश विसर्जन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग शोभायात्रा के साथ चलते हुए धार्मिक आयोजन का हिस्सा बने।
ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा मेंढर के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ी। रास्ते में श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। पूरे मार्ग पर धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।
इसके बाद शोभायात्रा ब्लॉक मनकोट के छज्जला क्षेत्र में पहुंची, जहां पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चारण के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा की और भगवान गणेश से परिवारों तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
गणेश विसर्जन समारोह में प्रमुख सनातन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया। इनमें देविंदर टंडन, बलराम शर्मा, अध्यक्ष बीओपीएआर मंडल मेंढर, राजीव गुप्ता, अध्यक्ष मजन सभा मेंढर, मास्टर रमेश बाली, महासचिव बीओपीएआर मंडल मेंढर, संजीव कुमार फैंसी, शालू शर्मा, संजीव बाली, सुधीर दत्ता और पंडित विश्व जी सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं और संस्कारों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। शोभायात्रा में युवाओं, बुजुर्गों और स्थानीय लोगों की भागीदारी देखने को मिली। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा को लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचे।
श्रद्धालुओं का कहना था कि गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। इस तरह के धार्मिक आयोजनों से लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर अपनी परंपराओं और संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में आपसी भाईचारे, शांति और सद्भावना बनाए रखने की भी कामना की। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की भावना भी दिखाई दी।
छज्जला में विधि-विधान से गणेश प्रतिमा के विसर्जन के साथ ही धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ। विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने भावुक होकर भगवान गणेश को विदाई दी और अगले वर्ष फिर से भगवान गणेश के आगमन की कामना की।
गणेश विसर्जन समारोह ने एक बार फिर मेंढर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी और भक्ति भाव ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।

















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