सेना के प्रति समर्पण से लेकर जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा तक, अभिनेता के सामाजिक योगदान की कहानी
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन सेना और कश्मीर के साथ उनका जुड़ाव भी काफी खास रहा है। उनका संबंध केवल पर्दे पर देशभक्ति के किरदार निभाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने वास्तविक जीवन में भी सैनिकों के बीच समय बिताकर उनका हौसला बढ़ाया और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की मदद की।
टेरिटोरियल आर्मी से जुड़ाव और सैन्य प्रशिक्षण
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1990 में नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े और मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना के प्रति उनका सम्मान और समर्पण उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।
कारगिल युद्ध के दौरान जवानों के बीच बिताए दिन
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने करीब 60 दिन अग्रिम इलाकों में सैनिकों के साथ बिताए। बताया जाता है कि उन्होंने द्रास, कारगिल, लद्दाख, कुपवाड़ा और बारामुला जैसे क्षेत्रों में जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने श्रीनगर के सैन्य अस्पताल में घायल सैनिकों से भी मुलाकात की।
सेना के साथ उनके जुड़ाव और योगदान के लिए उन्हें मानद सैन्य रैंक भी प्रदान की गई।
सीमावर्ती परिवारों की मदद के लिए आगे आए
नवंबर 2017 में नाना पाटेकर ने जम्मू, आरएसपुरा और सांबा के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की।
उनके द्वारा स्थापित नाम फाउंडेशन के माध्यम से पाकिस्तान की गोलाबारी से प्रभावित राजौरी और पुंछ के परिवारों की सहायता किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
बच्चों की शिक्षा को लेकर संवेदनशीलता
नाना पाटेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंतित रहे हैं। उन्होंने सेना के गुडविल स्कूलों की सहायता के माध्यम से बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में योगदान दिया।
उनका यह जुड़ाव दर्शाता है कि सैनिकों के सम्मान और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए किया गया प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
















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