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पुलवामा: केसर की खुशबू, प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध विरासत की धरती

चावल उत्पादन और दुग्ध उद्योग के लिए प्रसिद्ध है दक्षिण कश्मीर का यह जिला, ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से भी है विशेष पहचान

पुलवामा, जम्मू-कश्मीर। कश्मीर घाटी के मध्य में स्थित पुलवामा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, उपजाऊ भूमि, केसर की खेती और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहां के हरे-भरे खेत, नदियां, झरने, सुगंधित फूल और स्वादिष्ट फल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस जिले को चावल उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाले केसर के लिए देश-दुनिया में पहचान मिली है। दुग्ध उत्पादन में भी जिले का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसके कारण इसे ‘कश्मीर का आनंद’ कहा जाता है।

चार बस्तियों से विकसित हुआ पुलवामा शहर

पुलवामा के नाम और विकास से जुड़ा इतिहास काफी रोचक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मलिकपोरा, दलीपोरा, चट्टापोरा और डांगरपोरा नामक चार बस्तियों को मिलाकर एक गांव के रूप में विकसित किया गया था। कहा जाता है कि कश्मीरी भाषा में एक साथ मिलकर रहने के भाव से जुड़े शब्द ‘पनवन’ से इसका नाम पनवांगम पड़ा, जो आगे चलकर पुलगाम और फिर पुलवामा कहलाया। शुरुआत में यह एक तहसील मुख्यालय था, जो बाद में शहर के रूप में विकसित हुआ।

केसर और चावल उत्पादन में विशेष पहचान

पुलवामा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। जिले के पंपोर, काकापोरा और पुलवामा क्षेत्र की करेवा भूमि केसर की खेती के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां उत्पादित केसर अपनी गुणवत्ता और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, चावल की खेती भी जिले के किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी पुलवामा की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2019 के आतंकी हमले से जुड़ी दर्दनाक यादें

पुलवामा जिला 14 फरवरी 2019 को हुए भीषण आतंकी हमले के कारण भी देशभर में चर्चा में आया था। इस दिन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

प्रशासनिक संरचना और जनसंख्या

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले में 327 जनगणना गांव थे, जिनमें आठ निर्जन थे। जिले में पुलवामा, अवंतीपोरा, त्राल, पंपोर, काकापोरा, अरिपाल, राजपोरा और लिटर सहित आठ तहसीलें हैं। पुलवामा का भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 1,090 वर्ग किलोमीटर बताया जाता है। जिला मुख्यालय पुलवामा शहर श्रीनगर से करीब 31 किलोमीटर दूर स्थित है। उपलब्ध जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, यहां की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र

पुलवामा में कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। त्राल की खानकाह का संबंध महान सूफी संत मीर सैयद अली हमदानी से जोड़ा जाता है। ख्रेव स्थित ज्वालामुखी मंदिर भी क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल है। वहीं, अवंतीपोरा में प्राचीन राजा अवंतिवर्मन के शासनकाल से जुड़े मंदिरों के अवशेष इसकी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं।

कृषि, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों का अनूठा संगम पुलवामा को कश्मीर घाटी के महत्वपूर्ण जिलों में स्थान दिलाता है।

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