राजेश कुमार
हाजिन, सोनावरी, बांदीपोरा 4 सितंबर: अल जामिया फातिमतुल ज़हरा (र.अ.) लिल बनात, खुमैना बहाराबाद, हाजिन, बांदीपोरा की ओर से वार्षिक जलसा-ए-दस्तारबंदी एवं प्रमाणपत्र वितरण समारोह का आयोजन शुक्रवार को मरकज़ी हनफ़िया जामिया मस्जिद, खुमैना बहाराबाद, सोनावरी में किया गया।
कार्यक्रम का विषय “बेटियों को बचाएं, उन्हें दीन की शिक्षा दें” रखा गया था। इसका उद्देश्य बेटियों में धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देना और अभिभावकों को अपनी बेटियों को इस्लामी शिक्षा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। लोगों की भारी भागीदारी ने धार्मिक शिक्षा के प्रति समुदाय के समर्थन और रुचि को दर्शाया।
समारोह के दौरान छात्राओं के पिता को दस्तारबंदी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान अपनी बेटियों की धार्मिक शिक्षा के लिए उनके सहयोग, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के प्रति आभार के रूप में प्रदान किया गया।
संस्थान में विभिन्न स्तरों की धार्मिक शिक्षा पूरी करने वाली कुल 13 छात्राओं को सम्मानित किया गया। इनमें 2 छात्राओं ने हिफ्ज़-ए-कुरआन, 5 छात्राओं ने दर्जा-ए-सानिया और 6 छात्राओं ने नाज़िरा मआ तजवीद पूरा किया। हिफ्ज़-ए-कुरआन और दर्जा-ए-सानिया पूरा करने वाली छात्राओं के पिता को दस्तारबंदी और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जबकि नाज़िरा मआ तजवीद पूरा करने वाली 6 छात्राओं के पिता को दस्तारबंदी से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुफ्ती मुबारक अल कासमी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ मुफ्ती मारूफ अहमद कासमी भी मौजूद रहे। दोनों विद्वानों ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए छात्राओं में धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अल जामिया फातिमतुल ज़हरा की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भी आयोजकों, छात्राओं और उनके परिवारों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया तथा संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
आयोजकों ने कहा कि बेटियों को दीन की शिक्षा से जोड़ना मजबूत नैतिक मूल्यों वाले परिवारों और जिम्मेदार समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने अभिभावकों और समाज के लोगों से अपील की कि वे बेटियों की धार्मिक शिक्षा के लिए निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान करें।

















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