राजेश कुमार पुलिस दर्पण
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में विश्व प्रसिद्ध डल झील के संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण को लेकर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है। जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री जावेद अहमद राणा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर झील की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। बैठक में झील में पहुंच रहे प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण के साथ दीर्घकालिक संरक्षण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि झील में पहुंच रहे सीवेज के उपचार के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ-साथ अमृत योजना के तहत 30 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन है। इसके अगले दो वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि डल झील केवल श्रीनगर की पहचान ही नहीं, बल्कि कश्मीर की पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और पर्यटन संपदा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी स्वच्छता और प्राकृतिक स्वरूप बनाए रखना किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित एजेंसियों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। बैठक में झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, शहरी पर्यावरण अभियांत्रिकी तथा प्रदूषण नियंत्रण समिति के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का मानना है कि सीवेज प्रबंधन, नियमित निगरानी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से झील की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। डल झील श्रीनगर के पर्यटन उद्योग का प्रमुख केंद्र है और यहां शिकारे, हाउसबोट तथा आसपास के मुगल उद्यान बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में झील का संरक्षण स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

















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